लव जिहाद कानून के विरोध में याचिका,समीक्षा करने को राजी सुप्रीम कोर्ट

उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में बने अंतर्धार्मिक विवाह और धर्मान्तरण को लेकर बने विवाद वाले कानून पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गयी थी। जिसकी समीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है। हालांकि कोर्ट भी अन्तर्धार्मिक विवाह और धर्मांतरण को रोकने के लिए उत्तरप्रदेश में बनी कानूनों पर विवादास्पद प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार किया। इस कानून याचिकाकर्ता ने चुनौती देने का काम किया सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

योगी सरकार के खिलाफ जारी कि गयी एक चिट्ठी

लव जिहाद अध्यादेश पर 224 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व जजों के एक गुट योगी सरकार का समर्थन कर रही है। लेकिन इसी बीच एक चिट्ठी भी योगी सरकार के खिलाफ आयी है। 30 दिसंबर को 104 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स ने योगी सरकार पर आरोप लगाया तजा की ये सरकार नफरत की राजनीति कर रही है। और इसमें लव जिहाद को रद्द करने की भी मांग थी।

जवाब में एक पत्र लिखा गया

योगी सरकार के खिलाफ आये चिठ्ठी के जॉब में लिखा कि यूपी के मुख्य मंत्री को दोबारा सविधान पढ़ने के लिए कहना एक गैर जिम्मेदराना बयान है जो लोकतांत्रिक संस्थानों का अपमान करता है. ऐसा पहली बार नहीं है जब इसी गुट ने संसद, चुनाव आयोग यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट की छवि को धक्का पहुंचाने का काम किया हो। यूपी का अध्यादेश सभी धर्मों के लोगों पर लागू होता है।

मध्यप्रदेश में भी किया गया पहल
उत्तरप्रदेश में लव जिहाद क़ानून को ब्वने एक महीना हो गया है। वहीँ शिवराज सिंह चौहान ने भी लव जिहाद को रोकने के लिए कैबिनेट में सख्त कानून ‘धर्म स्वतंत्र’ विधेयक को राज्य में अध्यादेश के तौर पर लागू करने की मंजूरी देने का काम किया है। उत्तराखंड में 2018 से ही धार्मिक स्वतंत्रता कानून लागू है।
चुँकि ये तीनो राज्य भमे भाजपा की सरकार है इसलिए विपक्ष इस कानून का विरोह लगातार का रही है

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